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इस दिन वापस धरती पर लौटेगा इंटरेशनल स्पेस स्टेशन, क्या अब अंतरिक्ष पर नहीं जाएंगे वैज्ञानिक?…

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) साल 2030 में जब पृथ्वी पर लौटेगा, तब यह सिर्फ एक अंतरिक्ष स्टेशन का अंत नहीं होगा, बल्कि करीब 30 साल तक चले वैश्विक सहयोग और शांति का एक बड़ा अध्याय भी खत्म हो जाएगा। यह वह दौर था जब अंतरिक्ष मानव सहयोग का सबसे मजबूत उदाहरण बना।

नवंबर 2000 से अब तक ISS में लगातार इंसानों की मौजूदगी रही है। फुटबॉल मैदान जितना बड़ा यह स्टेशन पृथ्वी के चारों ओर करीब 8 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से घूमते हुए विज्ञान, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को आगे बढ़ाता रहा है।

तीन दशक तक इंसान की लगातार मौजूदगी

ISS अब तक का सबसे बड़ा मानव-निवास योग्य अंतरिक्ष प्रयोगशाला रहा है। यहां वैज्ञानिक प्रयोग, नई तकनीकों का परीक्षण और अंतरिक्ष में रहने की मानवीय क्षमता को समझा गया।

NASA के पूर्व अधिकारी जॉन हॉर्नयाक के अनुसार, 25 साल से ज्यादा समय तक दिन-रात इंसानों का अंतरिक्ष में रहना मानव इतिहास की एक असाधारण उपलब्धि है। यह दिखाता है कि इंसान टकराव की बजाय सहयोग को चुन सकता है।

शीत युद्ध के बाद सहयोग की मिसाल

ISS की योजना अमेरिका और रूस के बीच शीत युद्ध के बाद बने नए सहयोग की भावना से शुरू हुई थी। पुराने प्रतिद्वंद्वी देशों ने मिलकर इस स्टेशन को बनाया। यह बात खास मानी जाती है कि यूक्रेन युद्ध के कारण रूस और पश्चिमी देशों के रिश्तों में तनाव के बावजूद, ISS पर सहयोग अब तक बना रहा।

फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES के अधिकारी लियोनेल सुशे ने कहा कि मानव अंतरिक्ष उड़ान इतिहास की सबसे अहम अंतरिक्ष दौड़ रही है और ISS इसका सबसे महत्वपूर्ण चरण था।

पुराना हो रहा स्टेशन, तय है अंत

समय के साथ ISS के कई हिस्से पुराने हो चुके हैं और उनकी उम्र पूरी होने वाली है। इसी वजह से NASA ने एलन मस्क की कंपनी SpaceX को एक खास वाहन बनाने की जिम्मेदारी दी है, जो 2030 में ISS को सुरक्षित तरीके से पृथ्वी के वातावरण में वापस लाएगा।

जॉन हॉर्नयाक के मुताबिक, स्टेशन की रफ्तार कम की जाएगी और इसे प्रशांत महासागर के एक निर्जन इलाके में गिराया जाएगा, ताकि किसी इंसान या जमीन को नुकसान न पहुंचे। इस इलाके को पहले भी Mir स्पेस स्टेशन जैसे कई अंतरिक्ष यानों को गिराने के लिए इस्तेमाल किया गया है, जिसे ‘पॉइंटनीमो’ कहा जाता है।

2030 के बाद अंतरिक्ष की तस्वीर

ISS के खत्म होने के बाद लो अर्थ ऑर्बिट में सिर्फ चीन का तियांगोंग स्पेस स्टेशन ही बचा रहेगा। अब अमेरिका का ध्यान निजी कंपनियों द्वारा बनाए जाने वाले स्पेस स्टेशनों पर ज्यादा है। भविष्य में अंतरिक्ष एजेंसियों को अपने अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने के लिए निजी कंपनियों को शुल्क देना होगा। जेफ बेजोस की Blue Origin और Axiom Space जैसी कंपनियां व्यावसायिक स्पेस स्टेशन बनाने की योजना पर काम कर रही हैं।

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