ईरान के साथ संघर्ष में इजरायल कितनी देर टिक पाएगा? लंबा युद्ध हथियार और अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डालेगा…

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष आने वाले हफ्तों तक जारी रह सकता है।
इजरायल और अमेरिका दोनों के शीर्ष नेताओं ने संकेत दिया है कि यह टकराव जल्दी खत्म होने वाला नहीं है।
हालांकि अमेरिका ने भरोसा जताया है कि उसकी सैन्य क्षमता लंबे समय तक युद्ध जारी रखने में सक्षम है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल के लिए यह संघर्ष अधिक महंगा साबित हो सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में गाजा, लेबनान और सीरिया में सैन्य अभियानों के कारण पहले से दबाव झेल रहे इजरायल के लिए ईरान के साथ लंबा युद्ध सैन्य, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां पैदा कर सकता है।
ईरान के हमलों से बढ़ी सतर्कता
शनिवार को इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से ईरान की ओर से लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए हैं। इन हमलों के कारण पूरे इजरायल में कई बार एयर रेड अलर्ट जारी करना पड़ा है।
हाइफा और तेल अवीव जैसे बड़े शहरों में भी हमलों की चेतावनी के कारण लोगों को बार-बार बम शेल्टर में जाना पड़ा। कई स्कूल बंद कर दिए गए हैं और बड़ी संख्या में रिजर्व सैनिकों को भी बुलाया गया है। आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है और आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर भी इसका असर पड़ रहा है।
इजरायली समाज में युद्ध के समर्थन की लहर
वर्तमान स्थिति में इजरायल के भीतर युद्ध के समर्थन का माहौल भी देखने को मिल रहा है। कई शहरों में लोगों का मानना है कि ईरान उनके देश के लिए एक बड़ा खतरा है और उसे रोकना जरूरी है।
राजनीतिक स्तर पर भी अधिकांश दल सरकार के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का कहना है कि लगातार संघर्ष के कारण इजरायली समाज में सैन्य सोच और कठोर रुख और मजबूत हो सकता है। तेल अवीव विश्वविद्यालय के कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाला युद्ध समाज की सोच और राजनीति दोनों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
इजरायल की रक्षा प्रणाली पर दबाव
सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, अगर युद्ध लंबा चलता है तो इजरायल की रक्षा प्रणालियों पर भी दबाव बढ़ सकता है। इजरायल के पास तीन प्रमुख एयर डिफेंस सिस्टम हैं। आयरन डोम कम दूरी की रॉकेट और तोपखाने को रोकने के लिए बनाया गया है। वही, डेविड्स स्लिंग को मध्यम दूरी की मिसाइलों को रोकने में सक्षम है। और एरो-2 तथा एरो-3 सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने युद्ध के शुरुआती दिनों में ही बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। ऐसे में लगातार हमलों के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती है।
ईरान की मिसाइल क्षमता भी एक बड़ा कारक
विश्लेषकों का कहना है कि ईरान पिछले कुछ वर्षों से अपनी मिसाइल क्षमता बढ़ा रहा है। अनुमान के अनुसार ईरान हर महीने बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन कर रहा है।
हालांकि यह भी स्पष्ट नहीं है कि ईरान के पास कुल कितनी मिसाइलें और लॉन्चर मौजूद हैं। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ मिसाइलों की संख्या ही नहीं, बल्कि उन्हें लॉन्च करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
युद्ध से इजरायल की अर्थव्यवस्था पर असर
लगातार सैन्य अभियानों के कारण इजरायल की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार 2024 में गाजा और लेबनान से जुड़े सैन्य अभियानों पर इजरायल ने करीब 31 अरब डॉलर खर्च किए थे। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार 2025 में युद्ध से जुड़ा खर्च लगभग 55 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
बढ़ते सैन्य खर्च के कारण देश का बजट घाटा भी बढ़ा है और अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने 2024 में इजरायल की क्रेडिट रेटिंग में गिरावट दर्ज की थी।
अमेरिकी समर्थन बना अहम कारक
विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध कितने समय तक चलेगा, यह काफी हद तक अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों के समर्थन पर निर्भर करेगा। अगर अमेरिका इजरायल को उन्नत हथियार और तकनीकी सहायता देता रहता है तो इजरायल लंबे समय तक सैन्य अभियान जारी रखने की क्षमता बनाए रख सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष पूरे क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक राजनीति पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है।





