
दुर्ग। दुर्ग स्थित जिला अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां सामान्य उपचार से लेकर विशेषज्ञ सेवाएं तक उपलब्ध हैं, लेकिन दंत चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कमी महसूस की जा रही है।
वर्तमान में अस्पताल में केवल 65 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए खराब दांत बदलने (डेंचर) की सुविधा उपलब्ध है। जबकि हकीकत यह है कि दांतों की समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। कम उम्र के युवाओं, मध्यम आयु वर्ग के लोगों और यहां तक कि कई बार किशोरों को भी दांत टूटने, सड़ने या किसी दुर्घटना के कारण दांत खोने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
हर दिन विभिन्न आयु वर्ग के मरीज जिला अस्पताल के दंत विभाग में पहुंचते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निजी क्लीनिकों में दांत लगवाना या बदलवाना काफी महंगा साबित होता है। ऐसे में वे सरकारी अस्पताल से ही उम्मीद लगाकर आते हैं, लेकिन आयु सीमा के कारण उन्हें इस सुविधा से वंचित रहना पड़ता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दांतों की सही स्थिति केवल सौंदर्य का विषय नहीं है, बल्कि यह पाचन, उच्चारण और संपूर्ण स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है। समय पर दांत बदलवाने से कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव किया जा सकता है। इसलिए आवश्यकता है कि जिला अस्पताल में सभी आयु वर्ग के जरूरतमंद मरीजों के लिए दांत बदलने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
यदि यह सुविधा सार्वभौमिक रूप से शुरू की जाती है, तो इससे न केवल गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा भी और मजबूत होगा। जिला अस्पताल जैसे बड़े संस्थान में इस तरह की व्यापक दंत सुविधा शुरू करना समय की मांग है।





