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गृह मंत्रालय ने लुक आउट सर्कुलर जारी करने के नियम में बदलाव किया, क्यों हुआ यह फैसला यहां पढ़ें…

 गृह मंत्रालय ने लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और राष्ट्रीय कंपनी कानून अधिकरण (NCLT) जैसे वैधानिक निकाय सीधे ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (BoI) से किसी भारतीय या विदेशी को देश छोड़ने से रोकने के लिए LOC नहीं मांग सकेंगे।

गृह मंत्रालय ने साफ कहा है कि ऐसे सभी अनुरोध अब कानून प्रवर्तन एजेंसियों के जरिए ही भेजे जाएंगे। यह बदलाव पिछले महीने सभी संबंधित एजेंसियों को भेजे गए एक संदेश में किया गया है। इससे पहले ये निकाय सीधे BoI को अनुरोध कर सकते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। यह कदम LOC के दुरुपयोग को रोकने और प्रक्रिया को सख्त बनाने के लिए उठाया गया है।

वैधानिक निकायों पर रोक

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन वैधानिक निकायों के पास आपराधिक क्षेत्राधिकार नहीं है, वे LOC खोलने के लिए सीधे अनुरोध नहीं कर सकते। BoI को ऐसे किसी भी अनुरोध या आदेश मिलने पर तुरंत उसे वापस कर देना होगा। साथ ही उस निकाय को सूचित करना होगा कि वे LOC खोलने के अधिकृत नहीं हैं और उन्हें संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसी के पास भेजना चाहिए।

मंत्रालय ने NCW, NHRC, NCPCR, NCLT और किसी भी अन्य ट्रिब्यूनल जिसके पास आपराधिक क्षेत्राधिकार नहीं है को इस सूची में शामिल किया है।

पुरानी व्यवस्था में क्या था अंतर?

पहले के दिशानिर्देशों में इन निकायों पर सीधे अनुरोध करने पर कोई रोक नहीं थी। हालांकि, उनमें कहा गया था कि ऐसे अनुरोध के साथ पूरी जानकारी पुलिस जैसी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दी जाए। फिर संबंधित पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्थिति का आकलन करके LOC जारी करने का अनुरोध करेंगे। इमिग्रेशन अधिकारी केवल अधिकृत अधिकारियों से मिले संदेश पर ही कार्रवाई करेंगे।

LOC प्रोफॉर्मा में नए विकल्प

गृह मंत्रालय ने LOC के फॉर्म को भी अपडेट किया है। अब इसमें तीन मानकीकृत विकल्प दिए गए हैं।

  • डिटेन एंड इन्फॉर्म ओरिजिनेटर (रोकें और अनुरोधकर्ता को सूचित करें)
  • प्रिवेंट डिपार्चर एंड इन्फॉर्म ओरिजिनेटर (प्रस्थान रोकें और सूचित करें)
  • सी रिमार्क्स फॉर एक्शन (टिप्पणियां देखें और कार्रवाई करें)।

खुफिया एजेंसियां जैसे IB, RAW, CBI, NIA और राज्य ATS इकाइयां ‘सी रिमार्क्स’ कैटेगरी का इस्तेमाल केवल काउंटर-टेररिज्म के लिए कर सकती हैं।

कोर्ट ऑर्डर को लेकर नई प्रक्रिया

वहीं अगर कोई कोर्ट LOC को हटाने, रद करने या निलंबित करने का आदेश देता है, तो ‘ओरिजिनेटर’ (जिस एजेंसी ने LOC मांगा था) को कोर्ट से अनुरोध करना होगा कि वह आदेश सीधे उसे भेजे ताकि तुरंत कार्रवाई हो सके।

अगर इमिग्रेशन अधिकारी को व्यक्ति, कोर्ट रजिस्ट्री या केंद्र सरकार के वकील से सीधे कोर्ट आदेश मिलता है, तो उन्हें तुरंत ओरिजिनेटर एजेंसी को ईमेल से सूचित करना होगा। ओरिजिनेटर को बिना देरी के, अधिकतम 7 कार्य दिवसों में जवाब देना होगा। व्यक्ति के जाने की अनुमति तब तक नहीं दी जाएगी जब तक BoI सिस्टम में कोर्ट आदेश के अनुसार LOC अपडेट नहीं हो जाता।

एक अधिकारी ने बताया कि कई बार LOC वाले व्यक्ति इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) पर कोर्ट आदेश लेकर पहुंच जाते हैं। ICP के पास आदेश की सत्यता जांचने का कोई तरीका नहीं होता, इसलिए अब ऐसे आदेश ओरिजिनेटर के जरिए ही BoI तक पहुंचेंगे।

व्यक्ति की हिरासत के लिए नई समयसीमा

नए दिशानिर्देशों में LOC वाले व्यक्ति की हिरासत लेने के लिए समयसीमा भी तय की गई है। व्यक्ति के पता चलने पर BoI को तुरंत फोन, ईमेल या पोर्टल से ओरिजिनेटर को सूचित करना होगा।

अगर ओरिजिनेटर 3 घंटे में हिरासत नहीं लेता, तो इमिग्रेशन अधिकारी व्यक्ति को स्थानीय पुलिस के हवाले कर देंगे। फिर ओरिजिनेटर को 24 घंटे के अंदर हिरासत लेनी होगी और BoI इसकी निगरानी करेगा।

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