प्रशासन का दावा: कालाबाजारी नहीं हो रही, हकीकत: 984 रुपए का सिलेंडर बिक रहा है 2,500 रुपए तक…

छत्तीसगढ़ में एलपीजी की किल्लत के बीच गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी का बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो गया है।
आम लोग एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हैं और उन्हें 25 दिन बाद बुकिंग का इंतजार बताया जा रहा है, जबकि स्कूल और अस्पतालों को छोड़ कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई लगभग ठप है।
प्रशासन कालाबाजारी से इनकार कर रहा है, लेकिन दैनिक भास्कर की छत्तीसगढ़ की तीन बड़े शहरों रायपुर, बिलासपुर और भिलाई में की गई पड़ताल में किराना दुकानों, गोदामों और तय ठिकानों से 984 का सिलेंडर 1200 से 2500 रुपए तक में बेचने का खुलासा हुआ है।
कई जगह बिना पर्ची के महंगे दाम पर गैस दी जा रही है, तो कहीं ‘जुगाड़’ और ‘सेटिंग’ के जरिए सिलेंडर पहुंचाए जा रहे हैं।
भास्कर पड़ताल – पढि़ए अलग-अलग शहरों में किस तरह से परेशान हो रहे हैं आम लोग
रायपुर: किराना दुकानों, गोदामों और तय ठिकानों से सिलेंडर बेचे जा रहे
किराना दुकान में बिक रहा सिलेंडर
इंडेन लेने पर 400 एक्स्ट्रा लगेंगे, एचपी ले जाओ, 1250 दे दो स्थान: ग्रीन्स विले सोसायटी, हाउसिंग बोर्ड बोरियाकला रिपोर्टर- भैया सिलेंडर चाहिए। दुकानदार- कौन सा है? रिपोर्टर- इंडेन का। दुकानदार- इंडेन के लिए 400 रुपए एक्स्ट्रा लगेंगे। रिपोर्टर- इतना ज्यादा क्यों, 1200 में तो आप देते हो।
दुकानदार- रेट बढ़ गया है, अभी समस्या चल रही है। रिपोर्टर- ठीक है, लेकिन तब भी बहुत ज्यादा रेट है। दुकानदार- एचपी का ले लो, 1250 दे देना। रिपोर्टर – ठीक है दे दो। इसके बाद दुकानदार का एक व्यक्ति गाड़ी लेकर कहीं गया और 20 मिनट बाद एक सिलेंडर लेकर आया।
अभी नहीं है, जुगाड़ होगा तो कॉल करूंगा
स्थान: पचपेड़ी नाका, एचपी गैस गोदाम रिपोर्टर- भैया सिलेंडर चाहिए था। एजेंट- अभी तो नहीं है, रविवार को गोदाम बंद रहता है। रिपोर्टर- जरूरत है भैया एक्स्ट्रा ले लो। एजेंट- गोदाम बंद है भैया, नहीं तो कुछ व्यवस्था हो जाती। रिपोर्टर- जरूरत है भैया, कीमत चाहे जो लो। एजेंट- ठीक है, व्यवस्था होती है, तो आपको फोन लगाऊंगा। रिपोर्टर- कितना लगेगा भैया। एजेंट- मैं पहले व्यवस्था करता हूं, सामान दुंगा तो कीमत भी ले लूंगा।
3. डिलीवरी के लिए चुना टपरी, रोज सुबह यहां लगता है मेला पड़ताल के दौरान हमें एक नंबर मिला। हमने उस नंबर पर फोन किया तो 2500 रुपए में सिलेंडर देने पर बात हुई। युवक ने सिलेंडर लेने के लिए लाभांडी बुलाया।
यहां कोर्टयार्ड मैरियट के पीछे एक टपरी है। शनिवार को जब टीम पहुंची तो युवक ने बताया कि कुछ देर पहले ही सिलेंडर खत्म हुआ है, अब कल मिलेगा। इसी बीच कुछ और युवक 2 सिलेंडर लेकर पहुंचे। वहां मौजूद युवक ने दोनों सिलेंडर को कार में डाला और वहां से रवाना हो गए।
अगले दिन फिर टीम इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखने के लिए सुबह उसी टपरी पर पहुंची। सुबह करीब 10 बजे छोटे सिलेंडर की रीफिलिंग के लिए दो युवतियां भी पहुंची। उन्हें भी मना कर लौटा दिया गया। फिर इसी दौरान एक अन्य व्यक्ति एचपी का खाली सिलेंडर लेकर पहुंचा। युवकों ने उन्हें 2500 रुपए में सिलेंडर दे दिया।
भिलाई: पर्ची हो तो 986, नहीं तो 1300 लगेगा, ऑफिस में आ जाना
गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच जिले के कई इलाकों में कालाबाजारी और जमाखोरी हो रही है। सिलेंडर बिना बुकिंग के नहीं मिलते, लेकिन कई जगह ब्लैक में महंगे दामों पर बेचे जा रहे हैं। दुर्ग की गैस एजेंसी के गोदाम में एक कर्मचारी ने साफ कहा कि पर्ची हो तो 986 रुपए, नहीं तो 1300 रुपए लगेंगे।
रिपोर्टर- सिलेंडर मिलेगा क्या? कर्मी: आज तो नहीं हो पाएगा भैया। कल अगर लोड आएगा तो हो जाएगा। आज खत्म हो गया। देखिए न, ये एक… दो… तीन… चार ही बचे हैं। रिपोर्टर: कितना लगेगा? कर्मी: पर्ची कटाओगे तो 986 रुपए। रिपोर्टर: पर्ची तो नहीं कटी है न? कर्मी: कल आकर कटवा लेना।
(तभी बगल में खड़ी मुंह पर कपड़ा बांधे महिला ने कहा, मैं भी कल आती हूं… ग्यारह दूंगी। कर्मी ने कहा- तेरह। महिला बोली- चलो साढ़े ग्यारह। कर्मी ने कहा- यहां मत आना, जहां मिल रहा है वहीं से ले लेना।) रिपोर्टर: पर्ची नहीं हो तो? कर्मी: तेरह। रिपोर्टर: दोबारा पूछा… पर्ची नहीं हो तो भी मिल जाएगा न? कितना लगेगा? कर्मी: (झल्लाते हुए) अरे भाई, वही बात बार-बार… कल ऑफिस में आकर हैंडल कर लेना। वहां से मेरे पास आना, मिल जाएगा।
इन सभी एजेंट से बातचीत की रिकॉर्डिंग दैनिक भास्कर के पास उपलब्ध है।
बिलासपुर: शादी समारोह के लिए ब्लैक में 2000 रुपए का सिलेंडर
बिलासपुर में जहां आम उपभोक्ता गैस की किल्लत से जूझ रहे हैं, वहीं सामूहिक भोज में ब्लैक के सिलेंडर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। भास्कर टीम जब गोंड़पारा में मुन्नूलाल स्कूल के पास पहुंची, तो वहां सामूहिक भोज के लिए घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग होता मिला। पूछने पर खाना पकाने का ठेका लेने वाले व्यक्ति ने बताया कि सिलेंडर पहले से ही रखे गए हैं। इसी तरह शहर के अन्य इलाकों में भी सामूहिक भोज में ब्लैक के सिलेंडर उपयोग किए जाने की जानकारी मिली है।
हालांकि पहले की तरह केवल सिलेंडर से ही खाना तैयार नहीं किया जा रहा है। गैस के साथ लकड़ी का भी उपयोग किया जा रहा है। शहर के पुराना बस स्टैंड, तिफरा, लिंगियाडीह, मोपका, सीपत चौक, सरकंडा सहित कई इलाकों में खुलेआम गैस की कालाबाजारी होती रही है, लेकिन गैस की किल्लत शुरू होने के बाद यह काफी हद तक बंद हो गई है।
हालांकि चोरी-छिपे कुछ जगहों पर अभी भी गैस मिल रही है। कैटरिंग करने वाले लोग सेटिंग के जरिए अभी भी सीमित संख्या में ब्लैक में सिलेंडर हासिल कर लेते हैं। उन्हें 1000 रुपए का सिलेंडर 1500 से 2000 रुपए तक में मिल रहा है।
इसलिए परेशानी
- 20–25 दिन का इंतजार
- एजेंसियों के बाहर लंबी कतार
- होटल-ढाबों में इंडक्शन का इस्तेमाल बढ़ा
संकट की वजह
- गैस की सप्लाई में देरी
- कमर्शियल सिलेंडर वितरण प्रभावित
- बुकिंग का बैकलॉग
- डिमांड अचानक बढ़ना





