‘मासिक धर्म स्वास्थ्य जीवन का मौलिक अधिकार…’, SC का सभी स्कूलों में मुफ्त सैनिटरी पैड देने का आदेश…

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल जाने वाली लड़कियों के मासिक धर्म स्वास्थ्य (मैंस्टुरल हेल्थ) पर अहम फैसला दिया है।
कोर्ट ने मासिक धर्म स्वास्थ्य को जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा बताते हुए शहरों और गांवों के निजी एवं सरकारी सभी स्कूलों में लड़कियों को मुफ्त सैनेटरी पैड उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
शीर्ष अदालत ने स्कूल जाने वाले सभी स्कूलों में लड़कियों व लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालय और उनमें साबुन व निरंतर पानी की व्यवस्था करने के भी आदेश दिए हैं।
मासिक धर्म स्वास्थ्य जीवन का मौलिक अधिकार
कोर्ट ने आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए कहा कि आरटीई एक्ट के प्रविधानों का उल्लंघन पर निजी स्कूलों की मान्यता रद होगी और उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
सरकारी स्कूलों के लिए राज्य उत्तरदायी होंगे। कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें तीन माह में कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करेंगी।
जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने जया ठाकुर की याचिका पर शुक्रवार को यह ऐतिहासिक फैसला दिया। 126 पेज के विस्तृत फैसले मे कोर्ट ने कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
फैसले में कोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म स्वच्छता उत्पादों की अनुपलब्धता लड़कियों की गरिमा को ठेस पहुंचाती है।
सभी स्कूलों में मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना होगा
पीठ ने लड़कियों के मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता को जीवन के अधिकार और मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा (आरटीई) के अधिकार से जोड़ते हुए कहा कि मासिक धर्म स्वास्थ्य संविधान के अनुच्छेद-21 में मिले जीवन के मौलिक अधिकार के अंतर्गत आता है।





