यूपी बजट : योगी सरकार ने शहरी विकास के लिए खोला खजाना, ‘सिटी इकोनामिक रीजन’ से बदलेगी शहरों की तस्वीर…

योगी सरकार ने शहरों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए खजाना खोल दिया है। वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने नगर विकास विभाग और आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को 34,219 करोड़ रुपये दिए हैं। इसमें नगर विकास का 26,514 करोड़ रुपये का बजट है।
शहरों में मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने के लिए सरकार बड़ी धनराशि खर्च करेगी। 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की संस्तुतियों के क्रम में 4309 करोड़ रुपये नगरीय निकायों के लिए सरकार ने बजट में रखे हैं।
अपने वित्तीय संसाधनों के साथ ही नगरीय निकाय इनसे भी विकास कार्य करा सकते हैं। इससे स्वच्छता बढ़ाने व बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा।
सरकार ने शहरी अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए “सिटी इकोनामिक रीजन” योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत किसी बड़े शहर और उससे जुड़े कस्बों व औद्योगिक क्षेत्रों को एकीकृत कर आर्थिक विकास का माडल तैयार किया जाएगा।
सरकार ने इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। योजना का उद्देश्य शहरों को केवल आवासीय या प्रशासनिक केंद्र तक सीमित न रखकर उन्हें आर्थिक गतिविधियों का मजबूत हब बनाना है।
इसके तहत सड़क, परिवहन, लाजिस्टिक्स, औद्योगिक पार्क, वेयरहाउसिंग और व्यावसायिक कारिडोर विकसित किए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों को जोड़कर विकसित करने से उद्योगों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी और निजी निवेश आकर्षित होगा। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
प्रारंभिक चरण में इस राशि का उपयोग मास्टर प्लान तैयार करने, आधारभूत ढांचे के विकास और संभावित औद्योगिक क्लस्टर चिह्नित करने में किया जाएगा। योजना लागू होने के बाद शहरों में अनियोजित विस्तार पर रोक लगेगी और संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह माडल प्रभावी ढंग से लागू हुआ तो प्रदेश के प्रमुख शहर क्षेत्रीय आर्थिक केंद्र के रूप में उभर सकते हैं। बजट में सरकार का बड़ा फोकस इन्फ्रास्ट्रक्चर पर इस बार भी है। अमृत 2.0 के तहत पेयजल, सीवरेज तथा जल स्रोत के लिए इस बजट में 140 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
नए शहर प्रोत्साहन योजना के लिए 3500 करोड़
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को योगी सरकार ने 7705 करोड़ रुपये का बजट दिया है। वर्ष 2025-26 में आवास विभाग का बजट 7403.12 करोड़ रुपये था।
इस बार भी सरकार ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नए शहर प्रोत्साहन योजना में 3500 करोड़ रुपये की बड़ी रकम दी है। इससे हाल ही में गांव से शहरों में शामिल होने वाले नगरों में मूलभूत सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।
इस योजना के तहत ही मेरठ में 35, आगरा में 33 व लखनऊ में 22 वर्षों बाद नई आवासी योजना शुरू की गई है। बुलंदशहर में पहली बार औद्योगिक योजना लांच की गई है।
लखनऊ विकास क्षेत्र व अन्य के लिए 800 करोड़
लखनऊ विकास क्षेत्र तथा प्रदेश के अन्य विकास प्राधिकरणों की विकास योजना के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 800 करोड़ रुपये सरकार ने दिए हैं।
इसके अलावा मेरठ, मथुरा-वृंदावन एवं कानपुर विकास प्राधिकरण के अंतर्गत अवस्थापना सुविधाओं के लिए सरकार ने 750 करोड़ रुपये दिए हैं।
क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के लिए 194 करोड़
प्रदेश सरकार ने विश्व बैंक सहायतित “क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट” के लिए 194 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। इस परियोजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना और नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना है।
इसमें प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान कर उनके नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
इसमें एयर क्वालिटी मानिटरिंग स्टेशनों की स्थापना, डाटा विश्लेषण प्रणाली को मजबूत करना और प्रदूषण नियंत्रण उपायों को प्रभावी बनाना शामिल है।
शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव कम होंगे।
- मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के लिए-3500 करोड़ करोड़
- अमृत-2.0 में पेयजल और सीवरेज के लिए-140 करोड़
- लखनऊ में बने राष्ट्र प्रेरणा स्थल के प्रबंधन, संचालन, सुरक्षा व रखरखाव के लिए कार्पस फंड-50 करोड़
- शहरों में विकास कार्यों व सुविधाएं बढ़ाने के लिए खर्च होंगे- 4309 करोड़





