अंतरराष्ट्रीय

कोर्ट के बाद अब ट्रंप को भारत से झटका: ट्रेड डील हुई रीशेड्यूल, इन देशों के साथ चल रही बातचीत…

 ट्रंप टैरिफ को लेकर अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौते के वैधानिक दस्तावेज को अंतिम रूप देने का काम फिलहाल टाल दिया गया है। 

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों की टीम इस सप्ताह अमेरिका के वाणिज्य विभाग के सहयोगियों के साथ व्यापार समझौते के दस्तावेज को अंतिम रूप देने वाली थी।

इस प्रक्रिया को अगली तारीख तक के लिए टाल दिया गया है। अब तक के कार्यक्रम के मुताबिक आगामी मार्च में दोनों देश व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले थे।

गत शुक्रवार को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अप्रैल में ट्रंप प्रशासन की तरफ से विभिन्न देशों पर लगाए गए शुल्क को अवैध करार दे दिया।

उसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले सभी देशों पर 10 प्रतिशत का शुल्क लगाने की घोषणा की और उसके बाद इस शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। समझौते के बाद भारत पर लगने वाला शुल्क 25 प्रतिशत की जगह 18 प्रतिशत हो जाता जो नए आदेश के मुताबिक 15 प्रतिशत ही रह गया है। जानकारों का कहना है कि व्यापार समझौते से जुड़ी कार्रवाई के टलने से भारत को कोई नुकसान नहीं है।

अब सभी देशों पर 15 प्रतिशत के अलावा उन देशों पर पिछले साल अप्रैल से पहले जो शुल्क लगता था, वह लगेगा। जानकार यह भी बता रहे हैं कि ट्रंप की तरफ से लगाए गए इस 15 प्रतिशत के शुल्क को भी अमेरिकी अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

अमेरिका पर निर्भरता खत्म करने के लिए भारत का व्यापार समझौता मिशन जारी

निर्यात के लिए अमेरिका पर अपनी निर्भरता खत्म करने के लिए भारत दुनिया के अन्य विकसित व प्रमुख देशों के साथ लगातार व्यापार समझौते कर रहा है। इस साल भारत कनाडा, इजरायल, पेरू, चिली जैसे देशों के साथ व्यापार समझौते को अंजाम दे सकता है। कनाडा के साथ अगले कुछ दिनों में व्यापार समझौते पर वार्ता शुरू हो सकती है तो इजरायल के साथ भारत जल्द ही वार्ता शुरू कर सकता है।

इजरायल के साथ वार्ता में एजेंडा शामिल करने को लेकर पहले ही दोनों देशों में सहमति हो चुकी है। पेरू के साथ व्यापार समझौता की वार्ता लगभग पूरी हो चुकी है और अगले महीने दोनों देश समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक दुनिया के कई अन्य देश भी भारत के साथ व्यापार समझौता करना चाहते हैं।

आसियान और जापान के साथ यूपीए सरकार के काल में होने वाले व्यापार समझौते की समीक्षा की जा रही है ताकि इन देशों में भारत का निर्यात बढ़ाया जा सके। पिछले नौ सालों में भारत यूरोपीय यूनियन के 27 देशों को मिलाकर दुनिया के 38 विकसित देशों के साथ व्यापार समझौता कर चुका है।

ईयू के साथ अगले साल के आरंभ में तो ब्रिटेन और ओमान के साथ इस साल के अप्रैल में व्यापार समझौते पर अमल हो जाएगा। न्यूजीलैंड के साथ होने वाले समझौते पर इस साल सितंबर से अमल हो सकता है। अभी भारत सबसे अधिक अमेरिका में 86 अरब डॉलर का निर्यात करता है। विभिन्न देशों के साथ व्यापार समझौता होने से भारतीय निर्यात की निर्भरता अमेरिकी बाजार से कम होती जाएगी।

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