स्थानीय निकायों का पैसा बढ़ा, लेकिन फंड मिलने के लिए वित्त आयोग ने लगाई तीन शर्तें….

स्थानीय निकायों के जरिए स्थानीय शासन को सशक्त बनाने और शहरों में ढांचागत संसाधन, स्वच्छता, शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने के साथ ही शहरीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 16वें केंद्रीय वित्त आयोग ने स्थानीय निकायों के फंड में इस बार भारी बढ़ोत्तरी की है। लेकिन फंड मिलने के लिए सख्त शर्तें भी लगाई हैं।
फंड मिलने के लिए जो तीन शर्तें रखी गई हैं उनमें स्थानीय निकायों के चुनाव करा कर संवैधानिक रूप से निकायों का गठन होना चाहिए। फिर उनके आडिटेड और प्रोवीजनल एकाउंट्स सार्वजनिक रूप से प्रकाशित हों और तीसरी शर्त है कि राज्य वित्त आयोग समय पर गठित हो।
56100 करोड़ का विशेष इन्फ्रास्ट्रक्चर अनुदान
केंद्रीय वित्त आयोग ने बेसिक ग्रांट और परफारमेंस ग्रांट के साथ ही शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए पहली बार शहरीकरण प्रीमियम का अलग से 10000 करोड़ का फंड दिया है।
एक से चार मिलियन जनसंख्या वाले देश के 14 राज्यों को 22 बड़े शहरों में ढांचागत विकास के लिए 56100 करोड़ का विशेष इन्फ्रास्ट्रक्चर अनुदान रखा गया है इन 22 शहरों में उत्तर प्रदेश का लखनऊ और कानपुर भी शामिल है, जिसे 4281 करोड़ और 4202 करोड इस मद में मिलेंगे।
16वें वित्त आयोग ने राज्यों को स्थानीय निकायों के लिए जो ग्रांट आवंटित की है उसमें उत्तर प्रदेश को बहुत बढ़ोत्तरी मिली है। उत्तर प्रदेश को दूसरा सबसे बड़ा शहरी आवंटन प्राप्त हुआ है। उत्तर प्रदेश को कुल 33545 करोड़ रुपये मिलेंगे जो कि पिछले यानी पंद्रहवें वित्त आयोग में आवंटित रकम से करीब 73 प्रतिशत ज्यादा है।
राज्यों में स्थानीय निकायों को फंड
लोकल गवर्नमेंट यानी शहरी निकायों की वित्तीय स्थिति और कामकाज पर पिछले 25 वर्षो से काम कर रहे गैर सरकारी संगठन जनाग्रह ने वित्त आयोग की रिपोर्ट का विश्लेषण कर कहा है कि केंद्रीय वित्त आयोग ने जो शर्तें लगाई हैं ये एक अनुशासन कायम रखने के लिए लगाई हैं क्योंकि अभी राज्यों में स्थानीय निकायों को फंड देने के बारे में अनुशासन नहीं है इससे शहरों की व्यवस्था प्रभावित होती है।
पंद्रहवें वित्त आयोग ने क्या कहा?
संगठन के सार्वजनिक वित्त प्रबंधन निदेशक प्रभात कुमार 16वें वित्त आयोग द्वारा लगाई गई शर्तों पर कहते हैं कि पंद्रहवें वित्त आयोग ने भी शर्तें लगाई थीं लेकिन इस बार शर्तें ज्यादा स्पष्ट और व्यापक हैं।
जैसे पिछले यानी पंद्रहवें वित्त आयोग ने कहा था कि पैसा इलेक्टेड बाडी को मिलेगा लेकिन कई राज्य इसे कंटेस्ट करते थे, कि स्पष्ट तौर पर ऐसी शर्त का उल्लेख नहीं है अब इस बार संदेह दूर करते हुए स्पष्ट रूप से शर्त लगा दी गई है कि पैसा तब मिलेगा जब स्थानीय निकाय का चुनाव होकर संवैधानिक रूप से निकाय गठित होगा।





