
तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके और कांग्रेस ने आखिरकार विधानसभा चुनाव के लिए सीट-शेयरिंग फॉर्मूला तय कर लिया है।
डीएमके अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन तथा टीएनसीसी अध्यक्ष सेल्वापेरुन्थगई के बीच हस्ताक्षरित इस समझौते के तहत कांग्रेस को 28 विधानसभा सीटें मिलेंगी।
यह 2021 के गठबंधन में मिली 25 सीटों से तीन ज्यादा हैं। इसके अलावा कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट भी आवंटित की गई है।
जिसमें, कांग्रेस ने सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस के हिस्से के तौर पर 25 सीटों पर चुनाव लड़ा और 18 सीटें जीतीं थी। पार्टी नेताओं ने हाल के हफ्तों में संकेत दिया था कि वे इस बार ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं।
गठबंधन टूटने की कगार पर था, चिदंबरम ने बचाया
एक समय यह गठबंधन सत्ता में हिस्सेदारी और ज्यादा सीटों की मांग पर टूटने की कगार पर पहुंच गया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने पार्टी हाईकमान के दूत के रूप में मंगलवार को स्टालिन से मुलाकात की और लंबी बातचीत के बाद गतिरोध खत्म हुआ।
बुधवार रात को स्टालिन पहले डीएमके मुख्यालय पहुंचे। इसके बाद कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरिश चोडणकर, टीएनसीसी अध्यक्ष सेल्वापेरुन्थगई, विधायक दल के नेता राजेश कुमार सहित अन्य नेता मुख्यमंत्री से मिले और समझौते पर हस्ताक्षर किए।
कांग्रेस में खुशी का माहौल
समझौते के बाद पत्रकारों से बातचीत में सेल्वापेरुन्थगई ने कहा कि राज्यसभा सीट के उम्मीदवार का ऐलान टीएनसीसी और कांग्रेस हाईकमान जल्द करेगा। हम बहुत खुश हैं और हमें संतुष्टि की भावना है। गिरिश चोडणकर ने बताया कि पुडुचेरी के लिए सीट-शेयरिंग की औपचारिक बातचीत गुरुवार से शुरू होगी।
कांग्रेस की मांगें
यह समझौता डीएमके और कांग्रेस के बीच 2004 से चले आ रहे 22 साल पुराने गठबंधन की निरंतरता को सुनिश्चित करता है। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच थोड़ा अलगाव हुआ था।
कांग्रेस ने शुरू में सत्ता में हिस्सेदारी की मांग की, फिर सीटों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। जब बात नहीं बनी तो चिदंबरम को बातचीत के लिए भेजा गया। स्टालिन से मुलाकात के बाद डीएमके ने अपनी पेशकश 25 से बढ़ाकर 27 और अंत में 28 सीटों तक पहुंचाई, जिस पर सहमति बनी।





