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सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड से पूछा NEET-PG का कट-ऑफ घटाने का कारण, कहा- सीटों को लेकर बैलेंस बनाना जरूरी…

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बोर्ड आफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) को नीट-पीजी 2025-26 के लिए क्वालीफाइंग कट-आफ पर्सेंटाइल को काफी कम करने के अपने फैसले के बारे में बताने का निर्देश दिया है।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने शुक्रवार को एनबीईएमएस को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की।

पीठ ने कहा, ”एक तरफ हमें यह देखना होगा कि सीटें बर्बाद ना हों। साथ ही यह दबाव भी है कि अभ्यर्थी नहीं आ रहे हैं, इसलिए कृपया कटआफ कम करें।

फिर तर्क यह होगा कि मानक कम किए जा रहे हैं और विरोधी-तर्क यह होगा कि सीटें बर्बाद हो रही हैं। इसलिए कहीं न कहीं संतुलन तो होना ही चाहिए।”

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि खास वजहों को छोड़कर पीजी एडमिशन में अंकों में ढील नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि स्नातकोत्तर स्तर पर मानक और सख्त होने चाहिए।

शीर्ष अदालत ने चार फरवरी को केंद्र सरकार, एनबीईएमएस, नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) और अन्य को नोटिस जारी किए थे।

गौरतलब है कि देशभर में पीजी मेडिकल की 18,000 से अधिक सीटें खाली होने के कारण एनबीईएमएस ने नीट-पीजी, 2025 में प्रवेश के लिए क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल में बदलाव किया था।

इसे आरक्षित श्रेणी के लिए 40 पर्सेंटाइल से घटाकर शून्य कर दिया था, जिससे 800 में से माइनस 40 जितना कम स्कोर करने वाले भी पीजी मेडिकल सीटों के लिए काउंस¨लग के तीसरे चरण में हिस्सा ले सकेंगे।

सामान्य वर्ग के लिए नीट-पीजी कटआफ 50 से घटाकर सात पर्सेंटाइल कर दिया गया है।

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