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तीन लाख से अधिक लोगों ने ली अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक न खाने की शपथ, ‘एएमआर पर प्रहार’ अभियान का समापन…

एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) के बढ़ते खतरे के खिलाफ का एएमआर पर प्रहार अभियान मंगलवार को एक व्यापक जन आंदोलन के रूप में सामने आया।

एनसीआर में स्कूलों, कालेजों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, स्टेडियमों और सार्वजनिक स्थलों पर तीन लाख से अधिक लोगों ने एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग की शपथ ली।

अभियान के तहत 350 से अधिक संस्थानों व स्थानों पर शपथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके साथ ही एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) के खतरे को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सहयोग से दैनिक जागरण के राष्ट्रीय जन जागरूकता अभियान का औपचारिक समापन भी हो गया।

एएमआर पर प्रहार के शपथ कार्यक्रमों के तहत पूर्वी दिल्ली स्थित डॉ. अखिलेश दास इंस्टीट्यूट आफ प्रोफेशनल स्टडीज में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) की एएमआर कमेटी के चेयरमैन डा. नरेंद्र सैनी और दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन की प्रेसिडेंट डा. नीलम लेखी ने विद्यार्थियों और फैकल्टी को शपथ दिलाई।

इस अवसर पर डा. सैनी ने कहा कि जागरूकता ही एएमआर पर नियंत्रण का सबसे प्रभावी माध्यम है, जबकि डॉ. लेखी ने इसे अनदेखा गंभीर खतरा बताया।

मयूर विहार के विद्या बाल भवन स्कूल में 3,000, प्रियदर्शिनी विहार स्थित लवली पब्लिक स्कूल में 4,000 बच्चों ने एक साथ, तथा दशमेश पब्लिक स्कूल में 2,500 विद्यार्थियों ने शपथ ली।

सैनी एंक्लेव पार्क में स्थानीय नागरिकों ने भी संकल्प लिया। जबकि मध्य दिल्ली के जामा मस्जिद स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय उर्दू माध्यम नंबर-1 में विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रधानाचार्य गय्यूर अहमद को शपथ दिलाई। पंडारा रोड स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय में प्रधानाचार्य रमेश चंद ने विद्यार्थियों को एएमआर के खतरे से अवगत कराते हुए शपथ दिलाई।

पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर के भगवती विहार स्थित मुद्गल पब्लिक स्कूल में दंत चिकित्सक डॉ. विनय कुमार ने बच्चों को एंटिबायोटिक्स के उचित इस्तेमाल के बारे में जागरुक किया। इंडियन यूथ पावर संस्था के अध्यक्ष अधिवक्ता राकेश कुमार ने बच्चों को एंटिबायोटिक एएमआर की शपथ दिलाई।

नोएडा में लोगों ने ली शपथ

नोएडा में कुल 4,768 लोगों ने शपथ ली। जबकि गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने 350, इनोवेटिव ग्रुप आफ इंस्टीट्यूट में डा. मृत्युंजय पांडेय ने 100, जीएनआइओटी कालेज में चेयरमैन डा. अजीत कुमार गुप्ता के नेतृत्व में 5,500, आइटीएस इंजीनियरिंग कालेज में डा. मनीष कुशवाहा ने 150, जीएल बजाज कालेज में 150 विद्यार्थियों को शपथ दिलाई।

इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने 150 उद्यमियों को जागरूक किया। साहिबाबाद व गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन के 10 से अधिक स्कूल-कालेजों में 5,000 से अधिक छात्रों ने शपथ ली।

आइएमई कालेज में डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटिल ने शपथ दिलाई। विद्या बाल भवन, अर्वाचीन पब्लिक स्कूल, मदर्स प्राइड, सेंट टेरेसा पब्लिक स्कूल, एलआर कालेज सहित कई संस्थानों में कार्यक्रम हुए।

गुरुग्राम में डेढ़ लाख लोगों ने ली शपथ

इसी प्रकार गुरुग्राम में 100 से अधिक स्थानों पर डेढ़ लाख से अधिक लोगों ने एंटीबायोटिक के उचित उपयोग की शपथ ली। फरीदाबाद के 28 संस्थानों में 10,200 लोगों ने शपथ ली।मुख्य कार्यक्रम बल्लभगढ़ स्थित सुषमा स्वराज महिला महाविद्यालय में हुआ।

पलवल के एमवीएन कालेज, श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय और न्यू एज पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों ने शपथ ली। हापुड़ में 32 स्थानों पर 23 हजार से अधिक लोगों ने एएमआर पर प्रहार की शपथ ली।

सोनीपत जिले में 200 से अधिक सरकारी और करीब 30 निजी स्कूलों में 70 हजार विद्यार्थियों ने शपथ ली। इसके अलावा जीवीएम कालेज, हिंदू कालेज, राजकीय बड़ौता कालेज और गोहाना के राजकीय कन्या कालेज में 5,000 विद्यार्थियों ने संकल्प लिया। हिंदू कालेज में नगर निगम आयुक्त हर्षित कुमार और जीवीएम कन्या कालेज में सीटीएम डा. अनमोल ने शपथ दिलाई।

ऐसे चला एएमआर को लेकर जागरूकता का अभियान…..

बिना डॉक्टरी पर्चे के अपनी मर्जी से मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक खरीदकर खाने या डाक्टर द्वारा लिखी गई एंटीबायोटिक की पूरी खुराक न लेने से एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) का खतरा देश और दुनिया में तेजी से बढ़ता जा रहा है।

ये वो स्थिति है, जिसमें बैक्टीरिया अपने स्वरूप में बदलाव कर लेते हैं और इसके कारण भविष्य में होने वाले संक्रमण में एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं।

इस अदृश्य मौन महामारी एएमआर के खतरे के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए दैनिक जागरण ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के साथ संयुक्त रूप से राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया।

जहां एक ओर एएमआर के खतरे से सचेत करते हुए सात कड़ियों का समाचारीय अभियान चलाया गया, वहीं राज्यों में प्रतिदिन रिहायशी कालोनियों, स्कूल-कालेजों, अस्पतालों इत्यादि में लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें डाक्टरों ने लोगों को एएमआर के खतरे के प्रति सचेत करने के साथ ही बचाव के उपाय भी बताए।

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