महाराष्ट्र

’10 दिन में कुत्ता मर गया तो…’, डॉक्टर ने रेबीज को लेकर बताया मेडिकल फैक्ट, युवक ने डॉग बाइट के बाद कर ली थी खुदकुशी…

बीते हफ्ते महाराष्ट्र के कल्याण में 30 साल के बैंक कर्मचारी आयास विश्वनाथ अमीन ने खुदकुशी कर ली, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्हें लग रहा था कि उन्हें रेबीज हो गया है।

कुत्ते के काटने के बाद उन्होंने वैक्सीन शुरू की थी, लेकिन डर और चिंता इतनी बढ़ गई कि उन्होंने सुसाइड नोट में रेबीज के डर को ही वजह बताया। यह घटना दिखाती है कि भारत में रेबीज का डर कितना खतरनाक हो सकता है, खासकर तब जब लोग सही जानकारी न होने से घबरा जाते हैं।

डॉ. प्रियम बोरदोलोई ने X पर इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने लिखा कि अगर कुत्ता काटने के 10 दिन बाद भी जिंदा और स्वस्थ रहता है तो उस वक्त उसमें रेबीज नहीं था। यह कोई ओपिनियन नहीं, बल्कि स्थापित मेडिकल फैक्ट है।

रेबीज वायरस कुत्तों में कैसे पनपता है?

रेबीज वायरस कुत्ते के लार में पहुंचने के बाद जानवर संक्रामक हो जाता है और जल्दी ही लक्षण दिखने लगते हैं। लक्षण आने के बाद बीमारी बहुत तेजी से बढ़ती है और ज्यादातर मामलों में 10 दिनों के अंदर कुत्ता मर जाता है। इसलिए अगर काटने वाला कुत्ता 10 दिन बाद भी ठीक-ठाक है, तो उस काटने से रेबीज फैलने का कोई खतरा नहीं था।

यह नियम खासतौर पर तब लागू होता है जब कुत्ता पहचाना हुआ हो, जैसे पालतू, पड़ोसी का या कोई लोकल कुत्ता जिसे देखा-रखा जा सके। डॉक्टर ने साफ कहा कि कुत्ते की निगरानी एक मान्यता प्राप्त पब्लिक हेल्थ तरीका है, जो रिस्क समझने में मदद करता है।

इलाज कराना बेहद जरूरी

डॉक्टर ने बहुत जोर देकर कहा कि यह 10 दिन का यह फैक्ट वैक्सीन की जगह नहीं ले सकता। काटने के बाद पोस्ट-एक्सपोजर वैक्सीनेशन तुरंत शुरू करना जरूरी है, जैसा मेडिकल गाइडलाइंस कहती हैं। कुत्ते को देखना सिर्फ अतिरिक्त आश्वासन के लिए है, इलाज का विकल्प नहीं है। यानी बस इससे आपके मन का वहम दूर हो जाता है।

रेबीज इंसानों में लंबे समय तक छिपा रह सकता है। कभी-कभी महीनों या दुर्लभ मामलों में एक साल तक शरीर में छिपा रहता है। इसी वजह से वैक्सीन लेने के बाद भी लोग हफ्तों-महीनों तक डरे रहते हैं। लेकिन अगर व्यक्ति ने पूरी एंटी-रेबीज वैक्सीन सही से ली है और काटने वाला कुत्ता 10 दिन बाद स्वस्थ है, तो उस खास एक्सपोजर से रेबीज का खतरा खत्म माना जा सकता है।

डॉक्टर ने एक कड़वी सच्चाई भी बताई है कि एक बार किसी इंसान में रेबीज के लक्षण दिखने लगें, तो बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है। इसलिए रोकथाम ही एकमात्र रास्ता है कि वक्त रहते वैक्सीनेशन कराना चाहिए।

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