पश्चिम एशिया संकट: अब मैन्यूफैक्चरिंग पर दिखने लगा असर, ये सामान हो सकते हैं महंगे…

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के 20 दिन से ज्यादा होने लगे हैं। गैस की किल्लत के साथ अब औद्योगिक उत्पादन पर भी असर दिखने लगा है। टाइल्स से लेकर प्लास्टिक आइटम और यहां तक की अंडर गारमेंट्स का उत्पादन प्रभावित होता दिख रहा है। आयात की लागत बढ़ने से खाद्य तेल की कीमत बढ़ने लगी है।
दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई कच्चे माल पेट्रो केमिकल से जुड़े हैं। ऐसे में भविष्य में दवा की उपलब्धता में दिक्कत हो सकती है। गुजरात के मोरबी में सेरामिक-टाइल्स की 600 यूनिट है और इनमें से तकरीबन 560 यूनिट औद्योगिक इस्तेमाल के लिए गैस की कमी की चपेट में है। फिलहाल ये बंद हो गई हैं।
प्लास्टिक प्रोडक्ट का उत्पादन प्रभावित
सेरामिक-टाइल्स के उत्पादन से जुड़े कच्चे माल में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी गैस की है। मोरबी स्थित टाइल्स निर्माता कंपनी लेटोजा के निदेशक फिलिप ने बताया कि मोरबी की 600 टाइल्स यूनिट में चार लाख श्रमिक कार्यरत है और काम बंद होने से ये सब धीरे-धीरे अपने-अपने घरों को वापस लौट रहे हैं। उत्पादन बंद होने से टाइल्स की कीमत 25 प्रतिशत बढ़ चुकी है और आगे भी यह रुख जारी रहेगा।
वहीं, प्लास्टिक से बनने खिलौना, पीवीसी पाइप, बोतल, बाल्टी, ड्रम जैसे आइटम का उत्पादन भी प्रभावित होना शुरू हो गया है। प्लास्टिक दाना इनका कच्चा माल होता है जो पेट्रोलियम पदार्थों से निकलने वाले पालीप्रोपलीन से बनता है। पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति में बाधा और कीमत में बढ़ोतरी से प्लास्टिक दाने की कीमत में पिछले 20 दिनों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
अंडर गारमेंट्स में एलास्टिक का इस्तेमाल
ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के मुताबिक अप्रैल से प्लास्टिक आइटम का दाम बढ़ना शुरू हो जाएगा। अभी उनके पास कच्चे माल का पुराना स्टॉक है।
इस कारण निर्माता एकदम से कीमत नहीं बढ़ा रहे हैं। तिरुपुर स्थित अंडर गारमेंट्स निर्माताओं ने बताया कि अंडर गारमेंट्स में पोलिस्टर यार्न और एलास्टिक का इस्तेमाल होता है।
एलास्टिक का दाम पहले ही बढ़ चुका है और पोलिस्टर यार्न के दाम पिछले 20 दिनों में 35 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। 104 रुपए बिकने वाले प्रति किलोग्राम पोलिस्टर यार्न की कीमत 137 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
खाद्य तेल की कीमतें भी बढ़ीं
दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के साथ सिरिंज व उपचार में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक आइटम महंगे होने जा रहे है। दवा निर्माताओं के मुताबिक पैकेजिंग पर असर आने से दवा की सप्लाई धीमी हो सकती है।
जरूरत का 60 प्रतिशत खाद्य तेल भारत आयात करता है। सूरजमुखी, सोयाबीन व सरसों के तेल के पहले ही 10-20 रुपए प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। पाम ऑयल में भी मजबूती का रुख दिख रहा है। इन वजहों से तैयार खाद्य पदार्थों के दाम पिछले 22 दिनों में 20 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं।
किराए पर कैप हटाने व एटीएफ के दाम रिवाइज होने पर हो सकती है बढ़ोतरी
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हवाई जहाज के किराए पर जारी कैप को सोमवार से हटाने का फैसला किया है। हालांकि सरकार ने सभी एयरलाइंस को किराए को वाजिब रखने के लिए कहा है। लेकिन जानकार बता रहे हैं कि कैप के हटाने से हवाई जहाज के किराए में भी बढ़ोतरी तय है।
पिछले साल दिसंबर में इंडिगो की तरफ से विमान यात्रा पर असर डालने के बाद सरकार ने किराए पर कैप लगाने की घोषणा की थी।
जानकार यह भी बता रहे हैं कि हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाले एयर टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के दाम आगामी एक अप्रैल से रिवाइज किए जाएंगे और ऑयल कंपनियों की तरफ से इसमें बढ़ोतरी की पूरी संभावना है। ऐसे में अगले महीने से हवाई यात्रा महंगी होगी।





