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PHOTOS: सूर्यतिलक से आस्था के नए आकाश पर रामलला, अयोध्या में रामनवमी का ऐतिहासिक उत्सव…

कोटि-कोटि भक्तों के आराध्य एवं मानवीय आदर्शों व मूल्यों के महानायक श्रीराम का जन्मोत्सव युगों से भव्यता का प्रतिमान गढ़ने वाला रहा है और दो वर्ष पूर्व भव्य-दिव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के साथ रामलला के जन्मोत्सव का उल्लास नए शिखर का सृजन करने वाला प्रतीत हुआ।

यद्यपि इस बार रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से उपजा उत्साह सवा 26 माह पुराना हो गया है, किंतु तीन तल के राम मंदिर सहित सात पूरक मंदिरों के शिखर पर इसी सप्ताह आस्था का आत्मगौरव नए सिरे से हिलोर ले रहा है।

इसकी पुष्टि शुक्रवार को ब्रह्मबेला से ही हुई। सुबह पांच बजते-बजते हजारों श्रद्धालु रामजन्मभूमि मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए उमड़ चुके थे और प्रवेश द्वार खुलते ही यह प्रवाह पूरी त्वरा-तत्परता से आराध्य को आत्मसात करने के लिए आगे बढ़ा।

मध्याह्न 12 बजे राम जन्म का प्रतीक्षित अभिजित मुहूर्त आरंभ होते ही भक्त और भगवान का समीकरण जीवंतता के चरम की ओर बढ़ता है।

रामजन्मोत्सव पर राम मंदिर और रामनगरी रही आस्था के केंद्र में

अर्चकों की आत्मानुशासित पांत द्वारा सुगंध-शोभा के पर्याय पुष्पों तथा धूप-दीप से रामलला की प्राकट्य आरती के बीच एक ओर श्रद्धालुओं का व्यष्टि समष्टि में विलीन होता प्रतीत होता है, दूसरी ओर 15 करोड़ किलोमीटर का सफर तय कर धरती पर उतरने वाली भगवान भास्कर की रश्मियां अपने कुल के श्रेष्ठतम प्रतिनिधि श्रीराम का अभिषेक कर समष्टि के व्यष्टि में विसर्जन का संदेश दे रही होती हैं।

मध्याह्न में 12 बजे सूर्य की किरणों ने रामलला के ललाट का किया तिलक

लगभग सात से आठ मिनट तक सूर्य तिलक तो रामलला का हुआ और इससे परात्पर ब्रह्म माने जाने रामलला कितने प्रेरित-स्पंदित हुए यह तो वही जानें, किंतु सम्मुख सन्नद्ध आस्था की पूरी पांत, पीढ़ी और परंपरा जरूर प्रेरित-अनुप्राणित हो रही थी।

ऐसे लोगों में मंदिर प्रांगण में उपस्थित हजारों श्रद्धालु ही नहीं थे, बल्कि जीवंत प्रसारण और आस्था की भाव धारा में बंधे पूरे देश ही नहीं, दुनिया के अनेक हिस्सों के राम भक्त भी शामिल थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी नई दिल्ली में देखा सूर्यतिलक का सजीव प्रसारण


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित अपने कार्यालय में रामलला का सूर्य तिलक देखा, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट के माध्यम से रामलला के जन्मोत्सव का गौरव और उल्लास साझा किया।

रामलला की 12 मिनट तक चली प्राकट्य आरती, आरती के ही प्रारंभ में सात से आठ मिनट तक विशेष तकनीक के माध्यम से सूर्यतिलक और सात मिनट की स्तुति में निबद्ध आस्था की लौ आरोह का चरम छूने के बाद अवरोह की ओर लौटती है। रामजन्मभूमि परिसर तो आस्था के ज्वार का प्रधान केंद्र था ही, पुण्यसलिला सरयू से लेकर रामनगरी के हजारों मंदिर राम जन्मोत्सव के उल्लास में डूबे रहे।

सूर्योदय के पूर्व से पूर्वाह्न तक यदि पुण्यसलिला सरयू में लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई, तो कनकभवन, दशरथमहल, मणिरामदास जी की छावनी, रामवल्लभाकुंज, लक्ष्मणकिला, जानकीमहल, हनुमानबाग, हनुमन्निवास, बड़ा भक्तमाल, जानकीघाट बड़ास्थान, चारुशिलाकुंज आदि मंदिर आस्था के केंद्र में रहे।

इन मंदिरों में पूजन, अभिषेक, आरती, सत्संग, बधाई गान आदि से राम जन्मोत्सव की परंपरा, उसके निहितार्थ एवं संदेश पूरी रम्यता से उद्घाटित हुए और जिसे श्रद्धालु अपने साथ किसी थाती की तरह समेटते नजर आ।

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