राष्ट्रीय

‘पुनर्वास की शिकायत निपटाने में कितना समय लगेगा?’, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछे कड़े सवाल…

सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा के संजय नगर में अवैध निर्माण हटाने से प्रभावित हो रहे लोगों के पुनर्वास के बारे में उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से कहा है कि वह प्रभावित लोगों के पुनर्वास की शिकायत और परेशानी को निपटाने में कितना समय लेगी।

राज्य सरकार के वकील से निर्देश लेकर सूचित करने का आदेश देते हुए कोर्ट ने मामले को अगले सप्ताह फिर सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया।

ये आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और एसवीएन भट्टी की पीठ ने संजय नगर में अवैध निर्माण हटाने से प्रभावित हो रहे लोगों की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर वकील डाक्टर राजीव शर्मा की दलीलें सुनने के बाद जारी किये।

कोर्ट ने दिया था आदेश

इससे पहले राजीव शर्मा ने अवमानना याचिका का उल्लेख करते हुए कोर्ट से कहा कि लोगों को बेदखली का नोटिस मिल गया है और जल्द ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी।

लेकिन अभी तक राज्य सरकार ने प्रभावित हो रहे लोगों के पुनर्वास के बारे में कोई कदम नहीं उठाया है। जबकि, सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल 2023 को राज्य सरकार को आदेश दिया था कि वह प्रभावित हो रहे लोगों के पुनर्वास के लिए जल्द कोई योजना लाए।

राज्य सरकार ने कोर्ट के उस आदेश का पालन नहीं किया है कि ये कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। शर्मा ने कहा कि वहां करीब 5000 लोग रह रहे हैं और 700 मकान हैं।

शर्मा की दलीलें सुनने के बाद जब कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील से प्रभावित हो रहे लोगों के पुनर्वास के बारे में पूछा तो उन्होंने निर्देश लेने के लिए समय मांगा।

मथुरा के संजय नगर के अवैध निर्माण का मामला

कोर्ट ने प्रदेश सरकार के वकील से कहा कि वह निर्देश लेकर कोर्ट को बताए कि राज्य सरकार प्रभावित हो रहे लोगों के पुनर्वास की शिकायतों और परेशानियों को निपटाने के लिए कितना समय लेगी, जिसमें योजना के तहत उन लोगों ने पुनर्वास के लिए आवेदन कर रखा है।

कोर्ट मामले पर अगले सप्ताह फिर सुनवाई करेगा। यह मामला मथुरा के संजय नगर के अवैध निर्माण का है।

इस मामले में हाई कोर्ट ने अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ संजय नगर विकास सेवा समिति और प्रभावित लोग सुप्रीम पहुंचे थे और सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल 2023 को याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से तो इन्कार कर दिया था, लेकिन उसी आदेश में प्रदेश सरकार से कहा था कि वह प्रभावित हो रहे लोगों के लिए जल्द ही एक पुनर्वास योजना लाए।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कोर्ट के आदेश को तीन साल बीत गए, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक उनके पुनर्वास के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

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